लीडरशिप Hindi Tips अच्छे लीडर्स कैसे बने

Hindi Tips लीडरशिप  Best Lidership

माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नडेला ने उत्कृष्ट लीडरशिप से जुड़ी चार विशेषताएं साझा की हैं अच्छे लीडर्स टीम को दोष नहीं देते, अच्छे उदाहरण प्रस्तुत करते हैं

1. ‘मैं जानता हूं’ नहीं ‘मैं सीखना चाहता हूं’ कहिए जब हम समझते हैं कि हमें सब आता है, तो हमारे साथ एक बेहद मजेदार बात होती है, हम सीखना बंद कर देते हैं। जब आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं तो हम सीखना बंद नहीं करते, कुछ नया करने से डरते नहीं, गलतियों को अवसर की तरह देखते हैं। बस, यही बात हमें प्रतिस्पर्धा में फायदा देती है।

2. लीडर यदि स्पष्ट नहीं है तो वह भ्रांतियां पैदा करता है

लीडर चाहे स्मार्ट हो पर यदि स्पष्ट नहीं है, भ्रांतियां पैदा करता है, तो वह अच्छा लीडर नहीं है। अच्छा लीडर वह है जो अनिश्चित और अस्पष्ट परिस्थितियों से टीम को बाहर निकाल लाता है। टीम के साथ बेहद स्पष्ट रहेंगे, तो ही साथ काम कर पाएंगे, वरना साथ होते हुए भी अलग-अलग काम करेंगे।

3. ऊर्जा का मतलब सिर्फ सतही उत्साह नहीं है

लीडर ही अपनी टीम में ऊर्जा भरता है। ऊर्जा का मतलब केवल सतही उत्साह नहीं। ऊर्जा का मतलब है सभी को साथ लेकर चलना। हो सकता है आपकी टीम में उच्च स्तर के लोग हों, लेकिन यदि वे साथ मिलकर काम नहीं करते तो कोई फायदा नहीं। ऐसी टीम को लक्ष्य तक पहुंचने में वक्त लगेगा।

4.अच्छे उदाहरण होते हैं

अच्छे लीडर्स परफॉर्म करने के लिए सह मौसम का इंतजार नहीं करते, वे स्वैच्छिक रूप से कार्य करते हैं। सच्चे लीडर्स टीम को दोष नहीं देते, वे यह आंकने की कोशिश करते हैं. कि वे खुद कितना काम कर रहे हैं। जब लीडर सही उदाहरण पेश करेगा, तो टीम भी वही करेगी।

 

कर्मचारियों के योगदान की सराहना कर उनके काम को मान्यता दी जा सकती है ( Harvard Business Review)

1. सकारात्मक लीडरशिप का मतलब है साथियों के काम की, उनकी खूबियों की और उनके योगदान की सराहना करना। आप साफ शब्दों में ‘धन्यवाद’ बोल सकते हैं या कर्मचारी को सीनियर लीडरशिप के ज्यादा नजदीक से काम करने का अवसर दे सकते हैं। इस तरह के स्वीकारात्मक व्यवहार से कर्मचारी के काम को मान्यता मिलती है।

2. जब लीडर्स कर्मचारियों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझते हैं तो कर्मचारी बेहतर महसूस करते हैं। लीडर्स अपनी टीम के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में रह सकते हैं और उनसे व्यक्तिगत रूप से बात कर दिशा दे सकते हैं। इस तरह का व्यवहार लोगों की चिंता कम करता है और वे अपने काम पर फोकस कर पाते हैं, आपसी विश्वास विकसित होता है।

3. अनिश्चितता के इस दौर में कर्मचारी ऐसे लीडर्स पसंद करते हैं। ● जो उनके द्वारा दी गई जानकारियों को तुरंत देखकर उसपर तुरंत काम करते हैं। लीडर्स चाहें तो टीम के सदस्यों को बुलाकर मुद्दे उठा सकते हैं, संस्थान की उन्नति को लेकर चर्चा में उन्हें शामिल कर सकते हैं और नियिमत रूप से चर्चा करने के लिए एक मंच भी उपलब्ध करवा सकते हैं।

4. मुश्किल दौर में भी यदि नई जिम्मेदारियां दी जाएं तो कर्मचारी खुद ८० को सशक्त महसूस करते हैं। इसमें मैनेजेरियल ड्यूटी भी शामिल हो सकती है, यदि सुपरवाइजर्स पर काम का अधिक बोझ हो या उन्हें सहकर्मियों को मेंटर करने के लिए कहा गया हो। इस तरह की जिम्मेदारियों से कर्मचारी महत्वपूर्ण महसूस करते हैं और उनमें आत्मविश्वास जागता है।

5. लीडर्स जब कर्माचारियों को अन्य सहकर्मियों के साथ बात करने, उनके साथ काम करने के अवसर प्रदान करते हैं तो इस तरह भी वे कर्मचारियों का फायदा करते हैं। सहकर्मियों से बातचीत करने के अलग अलग तरीके निकाले जा सकते हैं। वर्चुअल कॉफी ब्रेक्स ले सकते हैं, हैपी आवर्स निकाल सकते हैं या जूम पर गेम्स खेल सकते हैं।