TOP 11 Famous Ganesh Temple चमत्कारी और प्राचीनतम मंदिर

ganesh temple in india

ganesh chaturthi special 11 ganesh temple गणेश जी के चमत्कारी और प्राचीनतम 11 मंदिर और उनसे जुड़ी अवस्थाएं मान्यताएंआज हम जानेंगे श्री गणपति जी के चमत्कारी और मनोकामना पूर्ण कहने वाले मंदिरों के बारे में

Ganesh Temple

1।  मधुर महागणपति, कासरगोड, केरल मंदिर

एक प्रसिद्ध मान्यता है कि छोटे बच्चे ने एक दिन मंदिर की दीवार पर गणेशजी की आकृति बना दी। बाद में चमत्कार यह हुआ कि ये चित्र धीरे-धीरे अपना आकार बढ़ाने लगा और ये आकृति बड़ी और मोटी होती गई।

Ganesh Temple

दीवार पर चमत्कारी रूप से उभरी इस प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे।  में यहां गणेशजी की पूजा मुख्य रूप से होने लगी

माना जाता है कि मंदिर के तालाब के पानी से त्वचा संबंधी एवं गंभीर रोग ठीक होते हैं। निर्माण 10वीं शताब्दी में कुंबला के माय पदी राजा करवाया था। मधुवाहिनी नदी के तट पर यह मंदिर स्थापित है। मंदिर में गुबंद तीन लेयर में बना है। वैसे मंदिर में मुख्य प्रतिमा भगवान शिव की है।

मान्यता है कि  मंदिर के सरोवर के पानी से त्वचा संबंधित सभी रोग विकार ठीक हो जाते हैं

यहां तक कैसे पहुंचा जाए

ये मंदिर केरल के कासरगोड शहर से करीब 7 किमी दूर स्थित है। यहां मोगराल नदी यानी मधुवाहिनी नदी के किनारे  स्थित है

2 । सीहोर के चिंतामण सिद्ध गणेश मंदिर

Ganesh Temple

सीहोर में चिंतामण सिद्ध गणेश में प्रतिमा आधी जमीन में धंसी है। मंदिर में स्थापित प्रतिमा को लेकर इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं यह है दो मान्यताएं
हैं।
1) पहली यह है कि प्रतिमा की स्थापना राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में हुई। थी। कहा जाता है विक्रमादित्य अपने देखे गए स्वप्न के आधार पर पार्वती नदी से

प्राप्त कमल पुष्प को रथ पर लेकर जा थे। रास्ते में रथ का पहिया जमीन में धंस गया और उस कमल से गणेश की यह प्रतिमा प्रकट होने लगी। विक्रमादित्य उसे निकालने का प्रयास कर रहे थे, पर वह जमीन में धंसने लगी। इसके बाद उन्होंने प्रतिमा यही स्थापित कर दी। दूसरी मान्यता के 


अनुसार अपने साम्राज्य का विस्तार करने निकले. पेशवा बाजीराव सीहोर पहुंचे तो यहां पार्वती उफान पर थी। लोगों ने बताया कि यहां गणेशजी स्वयं विराजमान हैं। उनकी आराधना करें तो उफान उतर जाएगा।

 उन्होंने प्रार्थना की तो ऐसा ही हुआ। उनके निर्देशानुसार यहां मंदिर का विस्तार कराया गया। मंदिर श्रीयंत्र के कोणों पर स्थित है। तब इस कस्बे का नाम सिद्धपुर था।

कैसे पहुंचे

सिद्ध गणेश मंदिर सीहोर ( MP ) उ-पश्चिम दिशा में गोपालपुर गांव में स्थापित है, गणेश मंदिर जिला मुख्यालय से 3 किमी दूर है भोपाल से 35 km    इंदौर – भोपाल सडक राज्य मार्ग पर स्थित है।

वायु मार्ग द्वारा राजा भोज एयर पोर्ट भोपाल से 35 कि. मी. हैं

3। इंदौर के खजराना गणेश मंदिर

Ganesh Temple


यहां के गणेश जी की प्रतिमा बावड़ी से निकली गणेश प्रतिमा है इस प्रतिमा को राजवाड़ा ले जाने की कोशिश हुई लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई

विस्तार से जानेंगे इस मंदिर की  खासियत

कहां पर स्थित है: इंदौर के खजराना मंदिर की गणेश प्रतिमा पास ही एक बावड़ी में मिली थी। मंदिर का जीर्णोद्धार 1735 में शुरू हुआ।

तत्कालीन काल में होलकर घराने की इच्छा थी कि प्रतिमा को राजबाड़ा लेकर आएं और यहां मंदिर बनाकर स्थापित करें। इसके लिए कोशिशें शुरू हुई, लेकिन गणेश प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। 


अंततः इसे भगवान की इच्छा मानकर वहीं मंदिर बनाने का निर्णय हुआ। आज भी बावड़ी उसी स्वरूप में परिसर में मौजूद है। मंदिर के पुजारी पं. अशोक भट्ट बताते हैं कि यह प्रतिमा परमारकालीन है। गणेशजी के लिए 65 किलो चांदी का यह सिंहासन जयपुर में बनाया जा रहा है। गणेश चतुर्थी पर खासतौर पर

 मोतियों का चोला चढ़ाया जाएगा। चार किलो सोने से बने स्वर्ण आभूषण भगवान गणेशजी, रिद्धि सिद्धि और लाभ शुभ को पहनाए जाएंगे। मंदिर में हर महीने करीब 40 लाख रुपए चढ़ावा आता है। यहां के अन्त्र क्षेत्र में हर दिन 1800 लोग निःशुल्क भोजन करते हैं।

मान्यताएं एवं मंदिर का निर्माण:

खजराना गणेश मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। यह मंदिर भारत के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। ज्यादातर बुधवार एवं रविवार को विशाल संख्या मे लोग दर्शन करने के लिए इस मंदिर में आते हैं। एक स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

हम यह कैसे पहुंच सकते हैं:

वायु मार्ग से हवाई अड्डा देवहिल्या अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। इंदौर एक ऐसा शहर है 

बस से इंदौर बस टिकट बुक करें।
इंदौर से जुड़े मुख्य राजमार्गों में सरलता से पहुचा  जा सकता है

4। मनाकुला विनायगर मंदिर, पुडुचेरी

Ganesh Temple


यहां के मंदिर से जुड़ी एक अनोखी कहानी जुड़ी है। कहा जाता है कि पुडुचेरी में फ्रांसीसी शासन के दौरान कई बार इस मंदिर पर हमले के प्रयास हुए और कई बार मंदिर में स्‍थापित गणपति प्रतिमा 


को समुद्र में डुबोया गया, पर हर बार यह अपने स्थान पर वापस आ जाती थी। कई बार मंदिर की पूजा में व्यवधान डालने की कोशिश भी की गई, लेकिन गणपति का यह मंदिर अपनी पूर्ण प्रतिष्ठा के साथ आज भी शान से खड़ा हुआ है।

मनाकुला विनायगर मंदिर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर की दीवारों पर प्रसिद्ध चित्रकारों ने गणेश जी के जीवन से जुड़े दृश्य चित्रित किए हैं,

शास्त्रों में गणेशजी के जिन 16 रूपों की चर्चा है वे सभी इस मंदिर की दीवारों पर नजर आते हैं।

समुद्र के पास मंदिर होने के कारण से इसे मनाल कुलथु विनयगर के नाम से जाना है। तमिल में मनाल का मतलब रेत और कुलम का मतलब तालाब होता है। अतः  इसे मनकुला विनयगर नाम दिया गया।

5। कनिपक्कम विनायक मंदिर, चित्तूर

Ganesh Temple


यह मंदिर आंध्र प्रदेश के कनिपकम में स्थित विनायक मंदिर है।
मंदिर का निर्माण चोल वंश ने 11 शताब्दी में करवाया था
इस मंदिर की चमत्कारी घटनाओं में से एक यह घटना है कि


मान्यता है की  भगवान गणेश की इस मूर्ति की खासियत यह है कि जैसे-जैसे मूर्ति का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे पुराने कवच छोटे पड़ जाते हैं।

मंदिर में मौजूद विनायक की मूर्ति का आकार हर दिन बढ़ता ही जा रहा है

लोगों के बीच विवाद को सुलझाने और बुराई को खत्म करने के लिए यह मंदिर विख्यात है। स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई

मान्यताएं हैं कि जो भी
गणेश जी  के यहां आने वाले हर भक्त के पाप को हर लेते हैं

मंदिर कहां पर है
मंदिर आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में मौजूद है

6। करपगा विनायगर मंदिर, तमिलनाडु गणेश मंदिर

Ganesh Temple

कहां पर स्थित है मंदिर
मंदिर तमिलनाडु के तिरुपथुर तालुक में पिल्लरेपट्टी में स्थित है। मंदिर का निर्माण पांड्या राजाओं द्वारा पिल्लरेपट्टी पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण किया गया है

यहा पर
ऐसी मान्यता है कि देवी कात्यायनी की प्रार्थना करने से कुंवारी लड़कियों का विवाह जल्दी हो जाता है और भगवान नागलिंगम की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है

किस मंदिर तक कैसे पहुंच सकते हैं
गूगल पर सर्च करके आसानी से पहुंचा जा सकता है

7 ganesh temple ranthambore
7। रणथंभौर गणेश मंदिर, राजस्थान 

Ganesh Temple

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रणथंभौर में स्थित ​प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर

क्या विशेषताएं हैं  : 
यहां गणेश त्रिनेत्र रूप में हैं।
भगवान गणेश पत्नी रिद्धि और सिद्धि एवं दो पुत्र- शुभ और लाभ के साथ विराजमान है।

यहां देशभर से हजारों लोग रोज आशीर्वाद पाने के लिए पत्र और शादी के कार्ड भेजते हैं।

मंदिर 1579 फीट ऊंचाई पर अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में स्थित है।
इतना प्रचलित है कि आप इसे विकिपीडिया पर भी पढ़ सकते हैं

8। मोती डूंगरी मंदिर, जयपुर गणेश मंदिर

Ganesh Temple


यह भगवान गणेश का यह बेहद सुंदर मंदिर है। 
मूर्ति में स्थापित गणेशजी दाहिनी सूंड़ वाले हैं. प्रतिमा पर सिंदूर का चोला चढ़या जाता हैं

यह मंदिर जयपुर में एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है।
इसे 1761 में सेठ जय राम पालीवाल ने बनवाया था। मान्यता है कि प्रतिमा 500 साल पुरानी है।

9। श्री सिद्धि विनायक, मुंबई

यहां भगवान गणेश अपनी दोनों पत्नी रिद्धि और सिद्धि के साथ विराजते हैं

मान्यता है कि यह 16वीं सदी का मंदिर है, लेकिन दस्तावेजों में निर्माण 1901 का है। गणेशजी की जिन प्रतिमाओं की सूड दाई तरफ होती है, वे सिद्धपीठ से जुड़ी होती हैं और

सिद्धिविनायक मंदिर कहलाते हैं। यह मंदिर पांच मंजिला है।

सिद्धिविनायक, भगवान गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है, 


  • ganesh temple pune

10 श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर, पुणे

Ganesh Temple

30 दिनों के भीतर पूरी होती है मुराद

यह मंदिर  महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है मन जाता हैं  ओर सबसे प्रमुख  

इस मंदिर का निर्माण;
पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर का निर्माण दगडूशेठ हलवाई द्वारा कराया गया था।

इससे जुड़ी एक कहानी है यह हैं की
दगडूशेठ हलवाई के पुत्र की प्लेग से मृत्यु के बाद उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

1890 के दशक में इसका निर्माण किया गया था। यह मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है।

11 उज्जैन के चिंतामण गणेश

Ganesh Temple

मान्यता है कि यह  मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से होती है हर मन्नत पूरी हो जाती हैं
उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में हुआ।

मंदिर के गर्भगृह में तीन प्रतिमाएं हैं- चिंतामण, इच्छामण और सिद्धि विनायक माना जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम जानकी और लक्ष्मण यहां आए थे।
उन्होंने यहां तीन प्रतिमाओं की स्थापना की थी

यहां पाती के लगन लिखाने और  विवाह की अनूठी परंपरा, बिना मुहूर्त के कराई जाती है शादी

यहां पाती के लगन लिखाने और विवाह कराने की अनूठी परंपरा है। मान्यता है कि जिन के लगन नहीं निकल रहे, उनके विवाह बिना मुहूर्त के यहां कराए जाते हैं। 


जिनके विवाह में बाधा आती है, वे यहां मन्नत मांगते हैं, साथ ही विवाह तय हो जाने पर परिसर में फेरे लेते हैं। विवाह के आयोजन के पहले श्रद्धालु निर्विघ्न विवाह के लिए चिंतामण गणेश को मना कर घर ले जाते हैं। विवाह हो जाने पर वर-वधु को आशीर्वाद दिलाने लाते हैं

तथा चिंतामणजी की पूजा आराधना कर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
। यहां विवाह करने के लिए हर साल 300 से ज्यादा जोड़े पहुंचते हैं।

‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
॥ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें

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