Great Speech in Hindi ग्रेट स्पीचेस ऑफ द वर्ल्ड; रतन टाटा

Great speech By Sir Ratan Tata

ग्रेट स्पीचेस ऑफ द वर्ल्ड आपकी पढ़ाई आपकी जिंदगी का सबसे अमूल्य निवेश है’

जीवन सिद्धांत

अपने स्वयं के जीवन सिद्धांत बनाइए। इससे देश का भविष्य भी बना रहेगा। क्योंकि बिजनेस लीडर्स कई दफा लीडर के बजाय फॉलोअर बने नजर आते हैं।

आप में से कई लोग ना सिर्फ देश के भविष्य को बनता हुआ देखेंगे बल्कि हिस्सेदार भी बनेंगे। आपके पास जो जिम्मेदारियां होंगी, वो भी कम महान नहीं होंगी। आने वाले वर्षों में आप में से कई इस देश के रहनुमा (लीडर) होंगे।

‘आप लोगों ने मेरी तारीफ में जो कसीदे कढ़े, उससे मैं अभिभूत हूं। मैं शुरू करूं उससे पहले एक छोटी-सी कहानी आपको सुनाता हूं जिससे यहां मौजूद महानुभवों को अहसास हो जाएगा कि मैं करता क्या हूं!

यह कहानी है एक आदमी की… जो दुकान पर तोता खरीदने गया था। उसने एक तोता चुना और दुकानदार से उसकी कीमत पूछी। दुकानदार ने कहा ‘5000 रुपए’ । आदमी बोला ‘ये तो बहुत महंगा है, यह तोता करता क्या है?’ दुकानदारा ने जवाब दिया ‘ये अपनी चोंच से अंग्रेजी में टाइप कर सकता है’। आदमी ने कहा ‘यह तो महंगा है, इस दूसरे तोते की क्या कीमत है?’ दुकानदार ने कहा ‘ओह यह… इसकी कीमत 10000 रुपए है और यह तीन भाषाएं बोल-समझ सकता है।’ आदमी बोला ‘मुझे यह सब नहीं चाहिए… वो आखिरी तोते की कीमत बताइए ?’ दुकानदार ने बताया ‘वो तो 30000 रुपए का है।’ आदमी ने चौंकते हुए पूछा ‘ये क्या करता है?’ दुकानदार का जवाब था ‘मैं वाकई नहीं जानता कि ये क्या करता है लेकिन सभी इसे ‘चेअरमैन’ पुकारते हैं।

तो मुझे भी लगता है कि मेरे संस्थान में कुछ लोग मेरे बारे में यही सोचते होंगे। मुझे वाकई खुशी हो रही है कि आप लोगों के ग्रेजुएट होने के खास लम्हे पर मैं आपके साथ हूं। अब आप सभी भारत की व्यापारिक दुनिया में प्रवेश करेंगे। इसे भारत ने अपने दम पर बनाया है और अब आप सबके पास मौका है इस देश के विकास में एक रोल निभाने का।

ये कई मायनों में ऐसा उल्लासपूर्ण लम्हा है कि मैं सिर्फ यहां खड़ा रहकर अफसोस कर सकता हूं कि इस वक्त मैं आपकी उम्र का क्यों नहीं हूं। इस देश के भविष्य को बनता हुआ, आप में से कई लोग ना सिर्फ देखेंगे बल्कि हिस्सेदार भी बनेंगे। आपके पास जो जिम्मेदारियां होंगी, वो भी कम महान नहीं होंगी। आने वाले वर्षों में आप में से कई इस देश के रहनुमा (लीडर) होंगे, इस किरदार में ना सिर्फ आपको आगे बढ़ना है बल्कि आपको अपनी लीडरशिप का नमूना भी अपने आसपास के लोगों को पेश करना है, ये वो लोग या समुदाय होंगे जिनके लिए आप सेवा करेंगे।

 

मैं आशा कर सकता हूं कि आप में से अधिकांश अपनी लीडरशिप को सिद्धांतवादी तरीके से मूल्यों के साथ आगे बढ़ाएंगे क्योंकि दुनिया में अगर इस देश को कहीं जगह बनाना है तो इसी बात को नींव में डालना होगा। मैं आशा करूंगा कि आप में से हर एक मिसाल पेश करता हुआ आगे बढ़ेगा। आप में से हर एक, खुद के अपनाए सिद्धांतों के साथ जिएगा। इससे आपमें एक दृष्टिकोण विकसित होगा। ऐसा करेंगे तो देश का भविष्य बना रहने की उम्मीद है क्योंकि हमारे बिजनेस लीडर्स कुछ दफा लीडर के बजाए फॉलोअर बने नजर आने लगते हैं।

सिद्धांतों के साथ जीने के लिए आपको संकल्प और विश्वास की भावना को बनाएं रखना होगा कि जो आप कर रहे हैं सही कर रहे हैं। मेरा मानना है कि कई-कई बार आपके मन में शक भी पैदा होंगे कि आपका चुना हुआ रास्ता सही भी है या नहीं। लेकिन अगर आप विश्वास रखते हैं कि आप जो करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे खोज रहे हैं वो सही है तो दृढ़ संकल्प के साथ डटे रहिए, मुझे भरोसा है कि

आप सफल जरूर होंगे। कामयाब होने के लिए आप सभी के पास एक खास रोल है – इसी से आप साबित करेंगे कि आपका निवेश, या आपके माता-पिता का आपकी पढ़ाई-लिखाई में किया गया निवेश ही आपके जीवन का सबसे अमूल्य निवेश है। मैं आशा करूंगा कि आप जैसे लोग जो संभ्रांत मुकाम हासिल करेंगे, हमेशा अपने व्यवहार में दीनता का प्रदर्शन करेंगे, फिर वो अपने कर्मचारियों के प्रति हो, कंपनी से हो या देश के प्रति हो। साथ ही अपने काम में भी जुनून बनाए रखेंगे। एक मुकाम पर जब आप सभी को अपनी तनख्वाह और अपने से जुड़े मूल्यों से संतुष्टि का अहसास हो तब मैं मानता हूं कि हम सब की एक और जिम्मेदारी हो जाती है। ये जिम्मेदारी है अपने आस-पास के ग्रामीण इलाकों के लोगों का जीवन स्तर सुधारने की, फिर यह छह भी हो सकते हैं और 70 करोड़ भी। मैं आशा करता हूं कि आप उन लोगों की जिंदगी को छुएंगे और इसी से इस देश का भविष्य भी बनेगा।’

• 8 अप्रैल 2006 को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस

में ग्रैजुएशन डे पर उद्योगपति रतन टाटाइं

स्पायरिंग स्पीच

सुपरस्टार शाहरुख खान
‘रचनात्मकता से कभी मत मत डरिए, यह आपको उत्साहित करती रहेगी’

क्रिएटिविटी आत्मा की प्रक्रिया है। जरूरी नहीं कि यह किसी प्रोडक्ट के रूप में जमाने के सामने आए और स्वीकार की जाए। इसमें केवल अभिव्यक्ति की सच्चाई होना चाहिए।

जिंदगी के यही साल हैं जब आप खेद-मुक्त होकर गलतियां कर सकते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो मौका है कि आप अपने सपनों को हासिल करें। जब आप 50 साल की उम्र में होंगे तब शायद समझ पाएंगे कि जो चाहते थे, वो नहीं कर पाने का बोझ कितना होता है। तो इस बोझ को इसलिए मत उठाइए कि आपके पिता लगातार पढ़ते रहने को कहते हैं और गुस्सैल मां इसलिए डिप्रेस है कि आप लिखावट अभी भी खराब है। आप मान के चलिए यह कभी ठीक नहीं होगी… लेकिन मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि कागज पर उकेरे गए ये कीड़े, मकोड़े, मक्खी – मच्छर कभी भी करिअर का खात्मा नहीं कर सकते।

पैरेंट्स के बारे में बात कर रहा हूं क्योंकि आज की रात उनके ही नाम है। मैं आपको मेरे पैरेंट्स के बारे में बताता हूं। मेरी मां टॉप क्लास थीं, वो वाकई कूल थीं। उन्होंने मुझे खूब प्यार किया और वो मानती थीं कि मैं दुनिया का सबसे मशहूर इंसान बनूंगा और मैं कुछ गलत कर ही नहीं सकता। मेरे पिता जेंटलमेन थे, काफी पढ़े-लिखे थे और कानून में मास्टर थे। खूब समझदार थे, दुनिया देखी थी और सात भाषाएं जानते थे। अपने देश भारत के लिए उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, वो अच्छे कुक थे… हॉकी, पोलो और स्वीमिंग के बढ़िया खिलाड़ी भी। वो काफी गरीब भी थे, बेरोजगार थे और मेरी जिंदगी के 15 साल तक उन्हें जद्दोजहद करते देखा। वो मुझे अच्छे गिफ्ट्स भी नहीं दे पाते थे, उनकी ही कुछ पुरानी चीजें अखबार में लपेट कर दे दिया करते थे और उसे बर्थडे गिफ्ट का नाम दे देते थे। वो जो गिफ्ट उन्होंने मुझे दिए उनकी ही कहानी आपको बताउंगा जिनकी मदद से मैं वो बन सका, जो मैं आज हूं।

जब दस साल का था तब पिता ने मुझे शतरंज दिया। वे शतरंज को जिंदगी का आईना कहा करते थे।

<span;>शतरंज सिखाता है कि हर चाल का एक नतीजा है, फिर आपने उसका अंदाजा लगाया हो या ना लगाया हो। इसका आप कुछ नहीं कर सकते, इसी तरह जिंदगी का एक भी लम्हा खाली नहीं है। तो चीजों को इसी तरह सोचिए, हर वक्त नहीं लेकिन अक्सर। इससे जिंदगी आपको चेसबोर्ड की तरह काली सफेद नहीं महसूस होगी और चौकोर बक्सों से मुक्त दिखेगी। इस खेल के प्यादे सिखाते हैं जीवन में छोटी-छोटी चीजों के बहुत मायने हैं। अगर आप अपने आस-पास

की छोटी चीजों को देखेंगे तो आपको खुद के खास होने अहसास होगा। जैसे आप अभी इस स्कूल में हैं और आपसे प्यार करने वाले पैरेंट्स की छत्र-छाया में हैं। इस तरह के वरदान की कद्र ना करना मूर्खता है, चेस में भी और जीवन में भी। इस खेल में आप फंसते भी हैं, आपकी हर चाल गलत साबित होती है… ठीक जिंदगी की तरह। बिल्कुल परेशान मत होइए। मामूली शर्मिंदगी के साथ इसे पार कर ही जाएंगे। जरूरी केवल यह है कि चाल चलना जारी रखिए।

पिता का दिया सबसे कीमती तोहफा एक इटेलियन टाइपराइटर था। गलतियों को हटाने के लिए टाइप एक्स’ का इस्तेमाल हम करते थे। ज्यादा टाइप एक्स को अच्छा नहीं माना जाता था इसलिए हमें अपनी अंगुलियों को सही चलाने के लिए खूब प्रैक्टिस करना होती थी। जब मैं वयस्क हुआ तो अहसास हुआ कि कर्मठता और मेहनत करने की आपकी क्षमता से ज्यादा कीमत किसी की नहीं है। प्रैक्टिस से सब आसान हो जाता है।

पिता ने मुझे एक कैमरा भी गिफ्ट किया था। मजेदार यह था कि वो काम नहीं करता था। इससे मैं सीखा कि चीजें हमेशा आवश्यकतानुसार काम नहीं करेंगी, वो खराब भी हो सकती हैं। अपनी क्रिएटिविटी से कभी मत डरिए, उसका सम्मान कीजिए। आपकी रचनात्मकता ही एकमात्र चीज है जो आपको उत्साहित करती रहेगी और संतुष्ट रखेगी। मैं भी कविता लिखता हूं और काफी बुरी लिखता हूं… कई बार यह इतनी बुरी होती है कि मैं खुद भी इसे नहीं पढ़ पाता, लेकिन फिर भी लिखता हूं। इससे मुझे खुशी मिलती है और आजादी महसूस होती है। आप भी अपनी ढूंढिए… दुनिया को यह पसंद आए तो अच्छा और नहीं आए तो और अच्छा !!

• 2016 में धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में अभिनेता शाहरुख खान।